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लंबी प्रतीक्षा के बाद समाचार
राम चौदह वर्ष से अयोध्या से दूर थे। सीता और लक्ष्मण ने उनके साथ वन का जीवन बिताया था और यात्रा उन्हें घर से बहुत दूर ले गई थी। अब लंका का संघर्ष समाप्त हो चुका था और सीता फिर राम के साथ थीं। वे उन मित्रों के साथ लौट रहे थे जिन्होंने कठिन समय में उनका साथ दिया था।
पहुँचने से पहले राम ने हनुमान को भरत के पास समाचार देने भेजा। भरत ने भाई की अनुपस्थिति में राज्य की देखभाल की थी। राम की पादुकाएँ उनके पास सौंपी गई ज़िम्मेदारी का चिह्न थीं। प्रतीक्षा लगभग समाप्त थी। हनुमान बता सकते थे कि राम, सीता और लक्ष्मण सकुशल लौट रहे हैं।
भरत की प्रसन्नता शब्दों में समाना कठिन था। समाचार फैला और स्वागत की तैयारी शुरू हुई। रास्ता तैयार किया गया; लोग यात्रियों के लिए फूल लाए। घर-वापसी के स्वागत में कई छोटे काम जुड़ते हैं। कोई माला लाता है, कोई मार्ग सँवारता है और कोई उस पड़ोसी को समाचार देता है जिसे अभी पता नहीं चला।
भाइयों का फिर मिलना
प्रतीक्षा करते हुए भरत बार-बार भाई के आने का संकेत खोज रहे थे। अंत में लौटता हुआ समूह दिखाई दिया। वे रामायण में वर्णित उड़ने वाले पुष्पक विमान में आ रहे थे। लंबी यात्रा समाप्त हो रही थी। यात्रियों में वे प्रिय चेहरे थे जिन्हें भरत ने बिछुड़ने के वर्षों में बार-बार याद किया था।
भरत आदर से राम के पास पहुँचे। राम ने उन्हें उठाकर गले लगाया। फिर भरत ने सीता और लक्ष्मण का स्वागत किया और साथ आए मित्रों से मिले। यह केवल किसी राजकुमार की नगर में वापसी नहीं थी। परिवार फिर मिल रहा था और उसकी खुशी में रास्ते भर साथ देने वाले मित्रों के लिए भी जगह थी।
भरत ने राम की पादुकाएँ और राज्य की ज़िम्मेदारी उन्हें लौटा दी। राम अपनी माताओं से मिले और नगरवासियों ने उनका स्वागत किया। बिछुड़ने के वर्षों को बदला नहीं जा सकता था, लेकिन अब नई शुरुआत थी। राम अपनी ज़िम्मेदारियों में लौट रहे थे और अयोध्या फिर साथ रहने वाले जीवन की ओर देख सकती थी।
दीपों में याद किया गया स्वागत
बहुत-से परिवार इस घर-वापसी को दीपावली से जोड़ते हैं। त्योहार की लोकप्रिय परंपरा में अयोध्या के लोग राम, सीता और लक्ष्मण के स्वागत में दीपों की पंक्तियाँ जलाते हैं। कल्पना करें कि छोटे-छोटे प्रकाश एक द्वार से दूसरे द्वार तक फैले हैं। हर दीया छोटा है, पर साथ मिलकर पूरा नगर स्वागत से जगमगाता है।
आज यह कथा सुनाते हुए हम एक प्रश्न पर सोच सकते हैं: किसी को अपनापन महसूस कराने के लिए हम क्या करते हैं? स्वागत में प्रिय कहानी, बैठने की जगह, कोई चित्र या ध्यान से सुनने का समय हो सकता है। किसी का स्वागत करने के लिए उसका बहुत बड़ा साहसिक काम करके लौटना ज़रूरी नहीं।
यह दीपावली की कई परंपराओं में से एक है। परिवार अलग-अलग तरह से त्योहार मनाते हैं। कुछ लक्ष्मी की पूजा करते हैं, कुछ दूसरी पवित्र कथाएँ या नया वर्ष याद करते हैं। यहाँ हमने घर-वापसी की कथा का सूत्र पकड़ा है। उसका प्रकाश प्रियजनों से फिर मिलने की खुशी और स्वागत में छिपी देखभाल याद दिलाता है।
